यंग स्कालर्स का कमाल पहले रिसर्च फिर दुनिया में धमाल

 


यंग स्कालर्स का कमाल पहले रिसर्च फिर दुनिया में धमाल 


कोविड के बाद समाजिक बदलाव पर की रिसर्च
स्टूडेंट्स और स्टडी पर कोविड 19 के दौरान रिसर्च
हाईस्कूल के नौ छात्रों ने किया यह रिसर्च का वर्क
इंटरनेशनल जर्नल में छप गईं ट्राईसिटी की रिसर्च

चंडीगढ़, 
ट्राईसिटी के होनहारों का क्या कहना। दिशा मिल जाए तो बस चल पड़ते हैं
अपनी मंजिल की ओर। नौ एेसे ही स्कॉलर हैं जिन्होंने कोविड 19 के दौरान
अपनी मेंटर के साथ मिलकर एेसे रिसर्च पेपर्स तैयार किए जिनको स्थान मिला
इंटरनेशनल जर्नल में।
ट्राईसिटी के इन होनहारों के साथ एजूसेनसेई की फाउंडर पुनीता वढ़ेरा और
डा. मीनाक्षी जिंदल चंडीगढ़ सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में मौजूद थीं।
पुनीता वढेरा ने बताया कि उनका उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को रिसर्च वर्क
में लाना था। उद्देश्य था कि हाईस्कूल स्तर के स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी
लेवल का काम सीखें और उसका अनुभव लें। उन्होंने बताया कि उनका पहला
प्रयास सफल रहा और नतीजा यह है कि मेंटर के साथ मिलकर तैयार किए गए
स्टूडेंट्स का रिसर्च वर्क इंटनरेशऩल जर्नल में स्थान ले चुका है।

उन्होंने बताया कि इस रिसर्च प्रोग्राम की शुरुआत 2019 में की। इस
कार्यक्रम के लिए पहला चैलेंज था कि युवाओं को तलाशना। जिसके लिए
एजूसेनसेई की टीम ने काफी मेहनत की। इसके बाद स्टूडेंट्स को रिसर्च वर्क
के बारे में समझाना और उसके साथ ही उनको फील्ड में काम करने का अऩुभव
प्रदान करना। यह तीनों ही काम आसानी से हो गए। स्टूडेट्स काफी अऩुभव ले
चुके हैं और वह नई से नई स्टडी करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि
उन्होंने स्टूडेंट्स को रिसर्च के संबंध में सारी जानकारी दी और नतीजा यह
हुआ कि पांच रिसर्च पेपर्स इंटरनेशनल जनरल में छपे।

पुनीता वढेरा ने बताया कि इन रिसर्च पेपर्स को लिखने में डॉ. मीनाक्षी
जिंदल ने स्टूडेंट्स की मदद की। डॉ. मीनाक्षी जिंदल ने बताया कि रिसर्च
के विषय के लिए काफी चैलेंज था। इसमें विषय वह लेने थे जो कि एकदम नए हों
और समसमायिक हों। इसलिए इसमें काफी समय लगा। उन्होंने बताया कि उनका डाटा
सैंपल ट्राईसिटी के युवाओं और अध्यापकों पर रहा। इसमें कोविड 19 महामारी
के कारण कारण पैदा हुईं समाजिक समस्याओॆं और समाजिक बदलावों पर काम किया।


एजूसेनसई के खास रिसर्च प्रोग्राम में प्रेक्टिकल और थ्योरी भी थी। इसमें
जिन स्टूडेंट्स ने कार्य किया उन्होंने रिसर्च की फील्ड का महत्व और उससे
जुड़े पहलू समझे। करीब एक साल पहले शुरू किए गए इस कार्यक्रम में पहली
रिसर्च युवाओं के बीच फेस टू फेस कम्यूनिकेशन और टेक्स्ट मैसेजिंग पर
अध्ययन किया गया। इसमें डा. मीनाक्षी के साथ एकमलीन कौर, अनहत सिंह,
अनुरीत वारेर और धावनी जैन शामिल रहीं।

इसके बाद दूसरी स्टडी युवाओं द्वारा आनलाइन फूड आर्डर करने की हैबिट और
उनकी पढ़ाई की आदत और लाइफ स्टाइल पर आधारित रही। इसको सान्या गोयल ने
किया। इस स्टडी के बाद जो पेपर लिखा गया उसको सोशल साइंस के इंटरनेशऩल
जर्नल आफ रिसर्च में सितंबर 2020 में प्रकाशित किया गया।

इसके बाद इस कार्यक्रम के अंतर्गत तीन स्टडी की गईं। इसमें कोविड 19 से
संबंधित इश्यू शामिल रहे। इसमें सान्या गोयल, अनहत सिंह, करम मान ने डा.
मीनाक्षी जिंदल के साथ मिलकर स्टडी की। यह स्टडी कोविड 19 के दौरान
शैक्षिक प्रणाली में बदलाव के बारे में शिक्षकों की धारणा और
शिक्षाविदों, सह-पाठयक्रम, स्कूल प्रशासन और परीक्षाओं के साथ स्कूली
शिक्षा के विभिन्न पहलुओं को कवर करती है। इस स्टडी को इंटरनेशनल जर्नल
ऑफ मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशनल रिसर्च में स्थान मिला।

तानिश वंगू, सौम्या गुप्ता और केसरप्रीत कौर ने कोविड 19 के बाद स्कूल
शिक्षा प्रणाली के बारे में छात्रों की धारणा विषय पर स्टडी की। उनका
पेपर इंटरनेशनल जर्नल आफ रिसर्च इन सोशल साइंसेंस में अक्तूबर 2020 में
प्रकाशित हुआ। एकमलीन कौर, अनुश्रेया सिंह वर्मा और अऩुरीत पारेर ने
कोविड महमारी के दौरान माध्यमिक विद्यालय के छात्रों के स्क्रीन टाइम के
साथ स्वास्थ्य, मानसिक और भावनात्मकता पर स्टडी की। यह स्टडी भी
इंटरनेशनल जर्नल आफ फिजिकल एंड सोशल साइंस में अक्तूबर 2020 में प्रकाशित
की गई।
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