एक साल में सब से ज्यादा फिल्में बनाने का रिकार्ड बना दिया इस निर्माता ने 

एक साल में सब से ज्यादा फिल्में बनाने का रिकार्ड बना दिया इस निर्माता ने 
एक साल में सब से ज्यादा फिल्में बनाने का रिकार्ड बना दिया इस निर्माता ने

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक ही वर्ष में सब से जियादा फिल्मे बनाने का रिकएड। जी हाँ दोस्तों आप ने कभी सोचा है की सब से जियादा फिल्मे बनाना और वह भी एक ही वर्ष में। चंदू लाल शाह जिन्हने सात बोलती और 13 मूक फिल्में एक वर्ष में बना दी। गुजरात के जाम नगर में 13 अप्रैल सं 1898 को जाम नगर गुजरात में इन का जन्म हुआ। मुंबई के सिडेनहम कॉलेज से इक्नोमिक्स में डिग्री हांसिल करके जल्द ही इन की नौकरी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लग गई।नौकरी से पहले उन्होंने अपने भाई जे डी शाह जो की माइथोलोजी फिल्मों की कहानियां लिखते थे की मदद की। चंदू लाल शाह को कहानियां लिखने का बहुत शोंक था। 

सं 1925 में फिल्म विमला के निर्देशन के लिए उन्हें लक्ष्मी फिल्म कंपनी ने बुलाया। इस से पहले फिल्म के निर्देशक मणि लाल जोशी थे जो की बीमार चल रहे थे। उस के बाद उन्होंने दो और फिल्मों का निर्देशन भी किया जिन में पांच डंडा (1925 ) और माधव काम कुंडला (1926 ) रही। 1925 में वह उस समय बन रही मूक फिल्मों के लिए कहानी लिखने लग गए। उन के एक मित्र जिन का नाम अमर चाँद श्रॉफ था जो की पहले से ही लक्ष्मी फिल्म कंपनी के साथ जुड़े हुए थे शाह को कोहिनूर कंपनी में ले आए। वहीं पर शाह की मुलाकात गोहर से हुई थी। गौहर उस ज़माने में एक मकबूल अदाकारा थी। गौहर अपनी आवाज में ही गीत गाया करती थी। शाह की कई फिल्मों में गोहर ही उन की नायिका रही। दोनों की अंडर स्टेंडिंग ऐसी हो गई की असल जीवन में भी यह पार्टनर बन गए।मशहूर फिल्म स्टूडियो रंजीत फिल्म कंपनी की स्थापना हो गई। साथ ही फिल्म निर्माण में जबरदस्त कार्य किया।


 टाइपिस्ट गर्ल (1926) वो पहली फिल्म थी जो स्वतंत्र रूप से शाह द्वारा निर्देशित की गई थी। इस फिल्म में गौहर और सलोचना ने खूबसूरत अभिनय किया था। फिल्म की खासियत यह थी की इस का निर्माण मात्र 17 दिनों में किया गया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कमाल कर गई। गौहर को ले कर शाह ने पांच फिल्मों का निर्देशन किया। सब से कामयाब गण सुंदरी (1927 ) रही। 1929 में चंदू लाल शाह ने रंजीत स्टूडियो की स्थापना की। सं 1970 तक रंजीत स्टूडियो में बहुत सी फिल्मों का निर्माण हुआ। 1929 से रंजीत फिल्म कंपनी के बैनर के तहत मूक फिल्मों का निर्माण शुरू किया था। सं 1932 तक इस कंपनी ने 39 फिल्मे बना डाली थी।जब बोलने वाली फिल्मे बनने लगी तो उसी वर्ष इस कमनी का नाम बदल कर रंजीत मूवीटोन कर दिया गया।


  फिल्म निर्माण के साथ -साथ चंदू लाल शाह ने भारतीय फिल्म उद्योग के संगठनात्मक कार्यों के लिए अपना बहुत समय दिया। फिल्म जगत की सिल्वर जुबली (1939)और गोल्डन जुबली (1963 ) के कार्यक्रम उन्ही के मार्गदर्शन में हुए। 1951फिल्म फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के वह पहले अध्यक्ष थे।
कहा जाता है की शाह का बुरा दौर उस समय हुआ जब राज कपुर और नर्गिस की फिल्म पापी और जमीन के तारे फ्लॉप हो गई थी। जुए और घोड़ों की दौड़ में अपना सारा पैसा लुटा दिया था। कभी बड़ी बड़ी कारों में घूमने वाले चंदू लाल शाह सरकारी बसों में घूमते नजर आए। 25 नवंबर 1975 को फिल्म उद्योग के सब से शक्ति शाली इंसान इस दुनिया को छोड़ कर चले गए।


चंदू लाल शाह ने इन फिल्मों की कहानी लिखी ;

सती सावित्री (1932 )गुण सुंदरी (1934)सिपाही की सजनी (1936)अकेली मत जइयो (1963 )
पापी (1953 )अछूत (1940) प्रभु का प्यारा (1936)

चंदू लाल शाह के निर्देशन में बनी फिल्मे
टाइपिस्ट गर्ल (1925) पांच डंडा (1925)विमला (1925)फाइव डिवाइन वांड्स (1925)माधव कम कुण्डला (1926)सिंध नई सुमारी (1927)गुणसुन्दरी (1927)विश्व मोहिनी (1928)ग्रह लक्ष्मी (1928)राजपूतानी (1929) पति पत्नी (1929 )चंदरमुखी (1929 )भिखारन (1929 )राज लक्ष्मी (1930 )माई डार्लिंग (1930 )दीवानी दिलबर (1930)देवी देवयानी (1931 )शील बाला (1932 )
सती सावित्री (1932 )राधा रानी (1932 )मिस 1933 (1933 )गुणसुन्दरी (1934 )तूफानी तरुणी (1934 )कीमती आंसू (1935 )देश दासी (1935)बमस्तर वाईफ (1935)सिपहिनी सजनी (1936)
सिपाही की सजनी (1936)प्रभु का प्यारा (1936)परदेसी पंखी (1937)अछूत (1940)पापी (1953)ऊट पटांग (1955 )जमीन का तारा (1960)



बतौर निर्माता
    वाइल्ड फ्लावर (1930) द टाइग्रेस (1930)रोमांस ऑफ राधा (1930)रणकदेवी किंवदंती पर आधारित रणक देवी (1930) आउट ऑफ सोरथ (1930) पैट्रियट (1930) प्यारी दुष्ट (1930)     कैस्टल्स इन द एयर (1930) डिवाइन दहेज़ (1930) भारत का गौरव (1930) जवान मर्द (1930)   लव एंगल (1930) मैजिक फ्लेम (1930) माई डार्लिंग (1930) बॉम्बे द मिस्टीरियस (1931)     युद्ध के कीड़े (1931) डेजर्ट डामसेल (1931) ड्रम ऑफ़ लव (1931) हूर-ए-रोशन (1931) लव बर्ड्स (1931) मिल्कमिड (1931) चित्रित परी (1931) प्रिंस चार्मिंग (1931) सिनिंग सोल्स (1931) बगदाद का सायरन (1931) द नाइफ (1931) लाल सावर (1932) सिपहसालार (1932) द कैप्टन (1932) भोला शिकार (1933) भूल भुलैया (1933) कृष्णा सुदामा (1933) मिस1933 (1933) परदेसी प्रीतम (1933) गन्सुंदरी (1934) कश्मीरा (1934)नादिरा (1934) सितमगर (1934) तूफ़ान मेल (1934) तूफानी तरुणी (1934) वीर बब्रुवाहन (1934)बैरिस्टर की पत्नी (1935) कॉलेज गर्ल (1935)  देश दासी (1935)  किम्ती आंसू (1935) नूर वतन (1935)  रात की रानी (1935) चालाक चोर (1936) दिल का डाकू (1936)  ज्वालामुखी (1936) लाहेरी लाला (1936) मतलबी दूनिया (1936) प्रभु का प्यारा (1936) राज रमानी (1936) रंगीला राजा (1936)     सिपाही की सजनी (1936) दिल फ़रोशी (1937) मिट्टी का पुतला (1937) परदेसी पंखी (1937) शमा परवाना (1937) शराफी लूट (1937) तूफानी टोली (1937) ज़मीन का चाँद (1937) बाज़ीगर (1938)  बन की चिड़िया (1938) बिली (1938) गोरख आया (1938) पृथ्वी पुत्रा (1938)प्रोफेसर वामन एमएससी (1938) रिक्शावाला (1938) सेक्रटरी (1938) अधूरी कहानी (1939) नाडी किन्रे (1939) संत तुलसीदास (1939) ठोकर  (1939) आज का हिंदुस्तान (1940) अछूत (1940) दिवाली (1940) होली (1940) मुसाफिर (1940)  पागल (1940) खंडोरा (1941) परदेसी (1941) ससुराल (1941) शादी  (1941) उम्मेद (1941) अरमान (1942) भक्त सूरदास (1942)  चांदनी (1942) धीरज (1942) सूखा सुख (1942)  फ़रियाद (1942) इकरार (1942)  महेमान (1942) तूफ़ान मेल की वापसी (1942) अन्धेरा (1943) बंसरी (1943) गौरी (1943) नर्स (1943) शंकर पार्वती (1943) तानसेन (1943) विश्वकन्या (1943) भंवरा (1944)     कारवां (1944)मुमताज़ महल (1944) पगली दुनीया (1944) शहंशाह बाबर (1944) चांद चकोरी (1945)  मूरति (1945) प्रभुका घर (1945) धरती (1946) फूलवारी (1946) राजपूतानी (1946) बेला (1947) छीन ले आजादी (1947)दुनिया एक सराय (1947) कौम हमरा (1947)     लाखो में एक (1947)  पिया घर आजा (1947) वो ज़माना (1947) बिछड़े बालम (1948) जय हनुमान (1948) मिट्टी के खिलौने (1948) परदेसी मेहमन (1948) भूल भुलैया (1949) गरीबी (1949)  नाज़रे (1949) जोगन (1950) (गैर मान्यता प्राप्त)  मधुबाला(1950)निली(1950)हमलोग (1951)  बहादुर (1953) फुटपाथ (1953) पापी (1953) औरत तेरी यही कहानी (1954) धोबी डॉक्टर (1954)अकेली मत जइयो (1963)





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