बच्चों के लिए आयुर्वेद का वरदान है 'स्वर्ण प्राशन', जानिए क्या है स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan)

  बच्चों के लिए आयुर्वेद का वरदान है 'स्वर्ण प्राशन', जानिए क्या है स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan) 


बच्चों के लिए आयुर्वेद का वरदान है 'स्वर्ण प्राशन', जानिए क्या है स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan)


बच्चों के लिए आयुर्वेद का वरदान है 'स्वर्ण प्राशन', उन्हें बलवान और बुद्धिमान बनाने के लिए 

आधुनिकता के इस युग में आज भी लोग अपनी संस्कृति को अपना रहे है। आयुर्वेद पर अब लोगों को पहले से अधिक विश्वास हो रहा है.जिस तरह पिछले कुछ वर्षों से स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan) के बारे चर्चा हो रही है जो की बच्चों के लिए बहुत लाभकारी है। 


क्या है स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan) ?

इस की अधिक जानकारी देते हुए डॉ. दिनेश मित्तल,सिटी हॉस्पिटल (City Hospital )डेराबस्सी में अस्पताल चलाते है और बच्चों को स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan) संस्कार के द्वारा हर महीने drops पिलाई जाते है।संस्कारो में से एक है स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan) संस्कार, 5000 वर्ष पुरातन आयुर्वेद में वर्णित 16 संस्कारों में से एक संस्कार है जो बच्चे के जन्म से लेकर 16 वर्ष की आयु तक कराया जाता है। स्वर्ण प्राशन संस्कार आयुर्वेद चिकित्सा की वह धरोहर है जो बच्चों में होने वाली अनेक बीमरियों से रक्षा करता है। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य में स्वर्णप्राशन  बहुत अच्छी भूमिका निभाता है।

कैसे बनाया जाता है स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan) 

स्वर्ण प्राशन  स्वर्ण (गोल्ड) के साथ शहद, गो ग्रित, ब्राह्मी, अश्वगंधा, गिलोय, शंखपुष्पी, वचा आदि जड़ी बुटियों से निर्मित एक रसायन है। इसका सेवन हर महीने पुष्य नक्षत्र वाले दिन करवाया जाता है। स्वर्णप्राशन  बहुत ही प्रभावशाली और इम्युनिटी बूस्टर होता है, जो बच्चों में रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा करता है।

क्या क्या लाभ है बच्चों को स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan Benifits) के ?

स्वर्ण प्राशन संस्कार से विभिन्न रोगों से लड़ने की क्षमता बच्चों मैं पैदा होती है। आयुर्वेद के क्षेत्र से जुड़े हमारे ऋषि मुनियों एवं आचार्यों ने हजारों वर्षों पूर्व वायरस और बैक्टीरिया जनित बीमारियों से लड़ने के लिए एक ऐसा रसायन का निर्माण किया जिसे स्वर्णप्राशन कहा जाता है। 


स्वर्ण प्राशन संस्कार के पालन से बालक की बुद्धि, मन, बल एवं पाचन शाक्ति  की वृद्धि होती है। साथ ही बच्चों की त्वचा मैं तेज की वृद्धि होती है। 
प्रतिदिन स्वर्ण प्राशन का सेवन अगर किसी अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में किया जाये तो बालक तेजस्वी बनता है।
6 माह तक नियमित सेवन से बच्चे में स्मरण शाक्ति की बढ़ोत्तरी होती है। बच्चा जो बाते सुनता है उसे वह हमेशा याद रहती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है अर्थात सामान्य बच्चों के मुकाबले यह बालक जल्दी से बीमार नही होता है।
शारीरिक शाक्ति में वृद्धि होती है ।
मानसिक एवं शारीरिक विकास होने से बालक होशियार और बुद्धिमान बनता है।
पाचन तंत्र मजबूत होता है।


कितने का मिलता है सुवर्णप्राशन Suvarnaprashan Price

यदि हम बात करें सुवर्णप्राशन के प्राइस के बारे में तो कई कंपनियों ने इसको मार्केट में उतारा हुआ है और सब के दाम या प्राइस अलग-अलग है बेहतर यही होगा कि खुद खरीदने के बजाय आप आपके क्षेत्र में जो अस्पताल है जहां पर सुवर्णप्राशन के ड्रॉप्स मिलाए जाते हैं वहां संपर्क कीजिए।

  
राज्यसभा सदस्य डॉक्टर लक्ष्मीकांत वाजपेई ने  स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan) प्रोजेक्ट के बारे राज्यसभा में जानकारी दी 

राज्यसभा सदस्य डॉक्टर लक्ष्मीकांत वाजपेई ने राज्यसभा में इसकी जानकारी देते हुए बताया  कि भारत में प्रतिवर्ष 33 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं। कुपोषित बच्चों में अधिकतर मौतें होती हैं। इसमें इम्यूनिटी की कमी सबसे बड़ा कारण है। 5000 वर्ष पूर्व महा ऋषि कश्यप ने स्वर्ण प्रशन का उल्लेख कश्यप संहिता मैं किया था। आधुनिक वैज्ञानिक युग में वर्ष 1975 में इसका परीक्षण चूहों और मनुष्य पर किया गया था। इसके अत्यंत ही बढ़िया परिणाम निकले। शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाने वाले टी सेल्स बी सेल्स और साइटोकींस बढ़ाने मैं इसके अनुकूल परिणाम आए हैं। 


उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गोरखपुर जिले के बड़सार गांव में जोकि सर्वाधिक कुपोषित क्षेत्र था 800 बच्चों पर सुवर्णप्राशन विधि से चिकित्सा की गई थी ऐसे बच्चों में लगभग 40% संक्रमण की कमी पाई गई थी। यह पायलट अध्ययन पीजीआई लखनऊ तथा सेंटर ऑफ बायोमडिकल रिसर्च लखनऊ तथा किंग जॉर्ज कॉलेज ऑफ यूनिवर्सिटी लखनऊ के चिकित्सकों और वैज्ञानिकों की देखरेख में संपन्न हुआ।  परिणाम प्रमाणिक है। इस प्रयोग से बच्चों में प्रयोग से आधुनिक मत के अनुसार पीवी एनसी की क्षमता वृद्धि के परिणाम स्वरुप न्यूनतम मात्रा पॉइंट जीरो वन माइक्रो मोलर और अधिकतम 55 माइक्रो मूलर तक देना सुरक्षित माना गया है। जैसे वैक्सीन दी जाती है उसी तरह सुवर्णप्राशन रोग प्रतिरोधक मैं वृद्धि कारक है। इसका प्रयोग कुपोषण बच्चे और किसी भी उम्र के उन मरीजों पर जिनकी इम्यूनिटी बहुत कम होती है किया जा सकता है। करोना काल में खासकर बच्चों पर यह कारगर सिद्ध हुआ है इस अनुसंधान में पीजीआई के डॉ गौरव पांडे बायोमेडिकल रिसर्च के डॉक्टर दिनेश कुमार वैद्य अभय नरायण और डॉक्टर आलोक शर्मा मेरठ शामिल थे। 

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