“अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए जीवन में सबसे जरूरी है, बातचीत बनाए रखना”- यह कहना है सोनी सब के ‘दिल दियां गल्लां’ के पारस अरोड़ा उर्फ वीर का
जीवन को दौलत से नहीं मापा जा सकता। जिंदगी की असली माप उन रिश्तों से होती है, जिन्हें आप सींचते हैं। कुछ ऐसे अल्फाज जो अनकहे रह गए हैं, वो पीढ़ियों तक रिश्तों का बंधन तोड़ सकते हैं। सोनी सब का हालिया शो, ‘दिल दियां गल्लां’, ऐसी ही एक कहानी है कि कैसे कुछ अनकहे अल्फाज एक परिवार के बीच विवाद पैदा करते हैं और फिर उसके परिणाम सामने आते हैं। हालांकि, रिश्तों के बीच कड़वाहट को सामने लाने की बजाय, इस शो में नई पीढ़ी के माध्यम से उम्मीद की एक किरण दिखाई गई है, जो अपने बड़ों के बीच दूरियों को कम करने का काम कर रही है।
‘दिल दियां गल्लां’, पंजाब की जड़ों से जुड़ी तीन पीढ़ियों की कहानी है और इस शो में दिग्गज अभिनेता पंकज बेरी को दिलप्रीत के रूप में दिखाया गया है। उनके साथ ही इस शो में बेहतरीन कलाकार हैं, जिनमें अमृता के रूप में कावेरी प्रियम, संजोत के रूप में जसजीत बब्बर, मंदीप के किरदार में संदीप बसवाना, मंदीप के रूप में रवि गोसाईं और रिया के रूप में हेमा सूद, शामिल हैं। इस शो में दिखाया गया है कि एक पंजाबी परिवार, पलायन के अंजाम को भुगत रहा है, जैसे भारत में कई सारे ऐसे परिवार हैं जो पलायन, गलतफहमियों और अनकहे शब्दों की वजह से अपनों से दूर रह रहे हैं। इस शो में पारस अरोड़ा, वीर का किरदार निभा रहे हैं, जिनका किरदार परिवार के बिछड़े हुए लोगों को एक साथ लाने में माध्यम का काम करता है। इस शो में अपने किरदार के बारे में उन्होंने चर्चा करते अपनी बात रखी।
1.एक बार फिर सोनी सब का हिस्सा बनकर कैसा महसूस हो रहा है?
यह बेहद ही सुखद एहसास है, क्योंकि सोनी सब के साथ यह मेरी चौथी साझीदारी है और मेरे लिए यह घर लौटने जैसा है। एक कलाकार के लिए, भला इससे बेहतर और क्या हो सकता है। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे यह मौका मिला क्योंकि मैंने पहले जिस तरह के किरदार निभाए हैं, उससे यह काफी अलग है। मुझे ऐसा लगता है कि दर्शकों ने अब तक जो देखा है यह शो अलग है और ‘दिल दियां गल्लां’ एक ताजी हवा के झोंके की तरह है। सोनी सब हमेशा से ही दर्शकों के लिए प्रासंगिक कंटेंट के लिए सबसे अच्छी जगह रहा है। इस शो के साथ मुझे पूरा विश्वास है कि हम इस एहसास में और इजाफा कर पाएंगे और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को छू सकेंगे। एक टीम के रूप में, हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं और मुझे उम्मीद है, परदे पर ‘दिल दियां गल्लां’ में यह बात बेहतर रूप से नजर आएगी।
2.इस शो में आपका किरदार किस तरह का है?
यह एक खास मौका है, जहां एक शो में मुझे एक ऐसा किरदार निभाने को मिल रहा है, जो पहले कभी नहीं देखा गया, यह बहुत प्यारा है और लोगों की नेकी पर भरोसा करता है। इसके बारे में और बताऊं तो वो समझदार है, परिपक्व, बुद्धिमान है और जरूरत पड़ने पर सही के लिए लड़ भी सकता है। भले ही बचपन में अपने मां-बाप को खोने के बाद उसका बचपन मुश्किलोंभरा रहा, लेकिन दिलप्रीत और संजोत ने इस बात का पूरा ख्याल रखा कि उसे घर की कमी महसूस ना हो। बेशक उनके साथ वह सबसे ज्यादा खुश होता है और उन्हें अपना सबकुछ मानता है।
3.सोनी सब के पिछले शोज़ के मुकाबले यह भूमिका किस तरह अलग है?
इससे पहले मैंने कई तरह के किरदार निभाए हैं जोकि एक-दूसरे से काफी अलग रहे हैं। अपने पिछले शो ‘काटेलाल एंड सन्स’ में मैं डॉक्टर की भूमिका निभा रहा था। सोनी सब के ‘दिल दियां गल्लां’ में मुझे एक ऐसा किरदार निभाने का मौका मिला है जो रिश्तों के बीच की दूरियां मिटाने में विश्वास करता है और मुश्किलों के बावजूद, उसकी सोच काफी पॉजिटिव है। यह एक ऐसा किरदार है जोकि उम्मीद की किरण लेकर आया है, जो जीवन के अच्छे पहलू को देखता है। वीर एक ऐसा इंसान है जो यह समझता है कि क्या चीज दांव पर लगी है। वह लोगों को करीब लाने की दिशा में काम कर रहा है। इस बेहतरीन किरदार के साथ काफी कुछ जानने के लिए है। मैं इस बात को मानता हूं कि मुझ पर विशेष कृपा हुई है, मुझे वीर की भूमिका निभाने का मौका मिला है। मुझे पूरा भरोसा है कि लोगों को वीर पसंद आएगा और हां, यह शो भी!
4.वीर की भूमिका के लिए आपने क्या तैयारी की?
हर किरदार के लिए कुछ खास स्तर की तैयारी की जरूरत होती है। इसलिए, वीर के किरदार की तैयारी करने के दौरान मुझे इस किरदार की सोच को समझना पड़ा। हालांकि, वीर वास्तविक जीवन में काफी कुछ पारस की तरह है, इसलिए ज्यादा प्रयास डायलॉग को सही अंदाज में बोलना, उसकी सोच को समझना और परिस्थितियों के अनुसार उसकी प्रतिक्रियाओं को समझाना था। वीर को लेकर कुछ बेहद ही आकर्षक चीज थी और मेरा पूरा ध्यान उसे परदे पर पेश करने का था। उसके पास काफी ताकत है, लेकिन एक ही समय में वह काफी बुद्धिमान भी है। किसी समस्या को बारीकी से देखने, लेकिन संवेदना के साथ उसे हल करने की उसकी काबिलियत मेरे लिए नई बात थी और वह ऐसा कुछ था, जिस पर काम करने के लिए मैंने काफी वक्त लगाया।
5.पंकज जी और कावेरी प्रियम के साथ काम करने का अपना अनुभव बताएं।
पंकज जी के साथ यह मेरा तीसरा शो है। वो इस प्रोफेशन में काफी लंबे समय से हैं और उनके पास बेहतरीन अनुभव है, तो ऐसे बड़े एक्टर के साथ काम करना बहुत बड़ी बात है। मैं हर दिन ही उनसे कुछ ना कुछ नया सीखता हूं। कावेरी के साथ यह मेरा पहला शो है, लेकिन मैंने उन्हें स्क्रीन पर देखा है। वह कमाल की हैं और मेरे कई सारे दोस्त ऐसे हैं जो उनके भी दोस्त हैं, इसलिए बातचीत शुरू करने में ज्यादा वक्त नहीं लगा। जब आपका को-स्टार अच्छा हो तो आपको सीन को बेहतर बनाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। यह अपने आप ही हो जाता है।
6.इस इंडस्ट्री में आपको 15 साल हो गए, आप इस सफर को कैसे बयां करेंगे?
सच कहूं तो मैंने कभी सोचा ही नहीं कि 15 साल बीत चुके हैं। जब मैं पीछे मुड़कर अपने सफर को देखता हूं तो ऐसा लगता है जैसे कोई सपना पूरा हो गया हो। मायथोलॉजिकल शोज़ से लेकर सोनी सब पर हल्के-फुलके कंटेंट करने तक, यदि मैं इसे शब्दों में बयां करूं तो यह लाजवाब रहा है। आज भी मुझे ऐसा लगता है जैसे यह मेरा पहला दिन है। आज भी जब भी सेट पर होता हूं उसी तरह हैरान होता हूं। मैं आज जो कुछ भी हूं उसे बनाने के लिए फैन्स ने जितना मुझे दिया है, उनके लिए दिल से आभार महसूस करता हूं।
7.’दिल दियां गल्लां’ के वीर से आप खुद को कितना करीब महसूस करते हैं?
यह किरदार मेरे लिए बेहद वास्तविक है, क्योंकि मैंने बहुत ही कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था, मेरे ऊपर काफी जिम्मेदारियां थीं और अपने काम के लिए मुझे काफी लंबे समय तक अपने पेरेंट्स से भी दूर रहना पड़ा था। वीर की काफी सारी चीजें मुझसे मिलती-जुलती हैं। मुझे पता है, समय से पहले बड़ा होना कैसा होता है। यह सोचना कि आपके काम का असर आपके आस-पास कैसे पड़ता है। मैं वीर को काफी कुछ ऐसा करते हुए देखता हूं। साथ ही मैं इस शो के कॉन्सेप्ट से खुद को काफी करीब महसूस करता हूं। साथ ही यह शो बड़ी ही खूबसूरती से दिखाएगा कि जीवन के उनके फैसलों और अपनों के साथ रिश्तों को कैसे बैलेंस किया जाता है। मैं खुद भी इस शो से मिलने वाली सीख को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करता हूं। ‘दिल दियां गल्लां’ में बहुत कुछ ऐसा है, जिनसे दर्शक काफी कुछ सीख सकते हैं।
8. इस बारे में आपकी क्या राय है कि पेरेंट्स अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए विदेश भेज रहे हैं और उनके वापस लौटकर ना आने पर निराशा का सामना कर रहे हैं?
हर पेरेंट्स अपने बच्चों को आगे बढ़ते हुए और बेहतर इंस्टीट्यूट में अच्छी शिक्षा हासिल करते हुए देखना चाहते हैं। इसलिए, वे अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए सबसे अच्छी जगह भेजने के लिए पूरी कोशिश करते हैं। लेकिन कई बार स्थिति अलग हो जाती है और बच्चे अपने पेरेंट्स के पास वापस नहीं लौटते; जिससे उन्हें दुख होता है। पेरेंट्स और बच्चों के बीच आपसी समझ होनी चाहिए। हम जो फैसला करते हैं, हमारे अपनों पर उसका असर नहीं पड़ना चाहिए। मुझे पता है कि बोलना आसान है लेकिन करना नहीं, पर कोशिश करनी चाहिए और इन चीजों को लेकर बात होनी चाहिए। एक-दूसरे से बात करने से चीजें आसान और बेहतर हो जाती हैं, क्योंकि इससे उलझी हुई चीजें सुलझती हैं। इसे हम अपने शो के जरिए दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि हमारे शो के जरिए हम लोगों पर सकारात्मक असर डाल पाएंगे।
9.इस शो से आपको क्या सीखने को मिल रहा है और आप इससे ऐसी कौन-सी चीज ले पा रहे हैं, जिससे आपको लगता है कि दर्शक भी जुड़ेंगे?
जीवन में रिश्तों को कायम रखने के लिए संवाद सबसे जरूरी होता है। जब परिवार में रिश्तों की बात आती है तो यह हमेशा ही बेहतर रहता है कि नई पीढ़ी ही अपने पेरेंट्स के पास जाए और अपने दिल की बात करें। हर समस्या का हल संभव है, यदि उसे स्पष्टता के साथ बोला जाए और उसमें किसी प्रकार का संदेह ना हो। कहने का मतलब है, हर रिश्ता दोनों तरफ से निभता है, इसलिए पेरेंट्स को भी अपने बच्चों की बात सुननी चाहिए। आपसी समझ से ही, चीजें पॉजिटिव होती हैं। हमारा शो ‘दिल दियां गल्लां’ का लक्ष्य तीनों पीढ़ियों के बीच पारदर्शिता का संदेश पहुंचाना है।
देखते रहिए, ‘दिल दियां गल्लां’, हर सोमवार से शनिवार, शाम 7:30 बजे, केवल सोनी सब पर

