हिम्स डेराबस्सी में मिलेट फूड फेस्टिवल व कुकरी वर्कशॉप संपन्न
डेराबस्सी: खेती विरासत मिशन तथा नेचुरल मिलेट प्रमोटर्स एसोसिएशन (एनएएमपीए) के संयुक्त तत्वाधान में हॉस्पिटल एंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिकल साइंसेज (हिम्स) डेराबस्सी में मिलेट्स फूड फेस्टिवल और कुकरी वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मास्टर शेफ मेघना शुक्ला ने बाजरा एवं अन्य मोटे अनाजों से व्यंजन बनाने की विधियों का प्रदर्शन किया।
शुद्धि आयुर्वेद के संस्थापक एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ, गुरु मनीष ने कहा कि कुकरी वर्कशॉप में मोटे अनाजों से व्यंजन बनाना सीखने के अलावा, मिलेट उत्सव में विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार भी रखे। ऑर्गेनिक बाजरा व अन्य मोटे अनाज बिक्री के लिए उपलब्ध कराये गये थे और लोगों ने मिलेट्स से बने व्यंजनों का स्वाद भी चखा। कुल मिलाकर यह उत्सव चमत्कारी मोटे अनाजों को फिर से जानने समझने का एक अवसर था।
हिम्स परिसर डेराबस्सी में जुगराज ढाबा के पीछे चंडीगढ़-दिल्ली राजमार्ग पर स्थित है और प्रतिष्ठित एनएबीएच मान्यता प्राप्त करने वाला पहला एकीकृत चिकित्सा विज्ञान अस्पताल है। इस अस्पताल की विशेषता भारत के सदियों से जांचे-परखे आयुर्वेद और पंचकर्म उपचारों में निहित है।
कार्यशाला में मोटे अनाज के बारे में सामान्य जानकारी के अलावा उनसे बने मुख्य भोजन और व्यंजनों के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इंदौर से आयीं शेफ मेघना ने कहा, "बाजरा या मिलेट चमत्कारिक अनाज हैं क्योंकि ये पौष्टिक मूल्य से भरपूर होते हैं। कार्यशाला में लोगों ने न केवल इनसे बने व्यंजनों के बारे में जाना, बल्कि इन्हें आहार में शामिल करने के लाभों के बारे में भी जागरूक हुए।"
शेफ मेघना ने अपने बेसिक सेशन में कुछ रेसिपी बनाना सिखायीं, जिसमें भारतीय भोजन में शामिल कुछ चीजें तैयार करने की विधियां शामिल थीं। बाद के सत्र का विषय था मल्टी कुजीन स्नैक तैयार करना। प्रतिभागियों ने स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाया। हिम्स में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर चुके मरीजों ने भी इसमें हिस्सा लिया। इस अवसर पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में डॉ. अमर सिंह आजाद भी मौजूद रहे।
गुरु मनीष ने कहा कि बाजरा जैसे मोटे अनाज न केवल स्वस्थ रहने के लिए बल्कि कई बीमारियों से बचने के लिए भी गेहूं और चावल से ज्यादा लाभकारी होते हैं। इनमें कंगनी, हरी कंगनी, सावां, कोडो, कुटकी, बाजरा, रागी, चना, ज्वार और मक्का जैसे अनाज शामिल होते हैं। मिलेट्स या मोटे अनाज शरीर को स्वस्थ और रोग मुक्त रखने में सक्षम हैं, क्योंकि ये कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, प्रोटीन एवं खनिज आदि से भरपूर होते हैं। आजकल जिस तरह का गेहूं खाया जा रहा है, वह जेनेटिकली मॉडिफाइड है।
शेफ मेघना शुक्ला
शेफ मेघना शुक्ला इंदौर से है। उन का कहना है कि वह पंजाब में 17 दिसंबर को पहुंची थी और उन्होंने कई शहरों में कुकरी वर्कशॉप लगाई है डेराबस्सी में यह दसवीं वर्कशॉप है। उनका कहना है कि हम लोगों को बहुत ही जबरदस्त रिस्पां मिला है। लोगों का उत्साह देखने वाला है, कई जगह तो लोग 2 से 3 घंटे का ट्रेवल करके भी इस वर्कशॉप को अटेंड करने आ रहे हैं। उनका कहना है कि यह एक मूवमेंट है पहले इसमें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। पंजाब में कुछ किसान इसको उगा रहे थे लेकिन उसमें सबसे बड़ी मुश्किल ये आ रही थी कि इसको प्रोसेसिंग करने के लिए कोई यूनिट नहीं था अभी इस वर्ष तीन यूनिट पंजाब में लग गए हैं जिससे अब प्रोसेसिंग हो रही हैl
पहले यह सब दक्षिण भारत से मंगवाना पड़ता था जो कि महंगा होता था। लेकिन अब पंजाब में भी प्रोसेसिंग होनी शुरू हो गई है।पंजाब के किसान इस की खेती कर रहे है और उन को दूसरी फसलों से ज्यादा फायदा हो रहा है।मिलेट के बनाने के बारे में ज्यादा पता नहीं था तो वह इसके चावल, दलिया और खिचड़ी बनाकर ही खा रहे थे.या ज्यादा से ज्यादा इडली डोसा ही बना रहे थे। लोग इसको मात्र एक मेडिसन या बीमार होने पर ही इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन हम लोग चाह रहे हैं कि इसको रोजाना फूड में इस्तेमाल किया जाए ऐसा ना हो कि लोग इसे केवल बीमारी ठीक करने के लिए ही खाएं। हम चाहते हैं कि इसको पूरा परिवार इस्तेमाल करें। इसी लिए मिलेट फ़ूड फेस्टिवल और कूकरी वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है।