एनिमेशन फिल्म लिख रहे हैं सलीम अहमद राज
सलीम अहमद राज एक बार फिर बॉलीवुड में सक्रिय हो गए हैं। दूसरे दौर में वह सिर्फ लेखन करना चाहते हैं। वह रोमांटिक, कॉमेडी और एनिमेशन फिल्म लिखने में रुचि रखते हैं। एनिमेशन फिल्म लिखने में वह विशेष दक्षता रखते हैं। देहरादून (उत्तराखंड) के बाशिंदे सलीम को मुंबई पधारे चार दशक हो गए हैं।
नौजवान सलीम अहमद ने एक फिल्म के निर्माण की घोषणा की थी। फिल्म का शीर्षक था - *अन्तरात्मा*। लगभग ढाई माह तक शूटिंग चलती रही। पर, व्यवधान उत्पन्न होना था, होता चला गया। गेईटी गैलेक्सी (बांद्रा) के जेम थियेटर में ट्रायल रखा, एक्जिविटर्स को दिखाया। पर, बात बनी नहीं। इधर पिक्चर के चक्कर में खार-बांद्रा लिंकिंग रोड (पश्चिम) के घर बिक गए, रेडिमेड गार्मेंट्स का बिजनेस ठप्प हो गया। निहत्था और अकेला पड़ गए सलीम।
सलीम बाज़ी हार गए थे, हिम्मत नहीं। कुछ समय पश्चात् एक और फिल्म शुरू कर दी - *फ़र्क*। लेकिन, कुछ फ़र्क नहीं पड़ा। फिर शीर्षक बदलकर *दंडित* किया तो स्वयं ही दंडित हो गए। सारा परिश्रम व्यर्थ गया। लेकिन, कहते हैं न कि दिल है कि मानता नहीं ! सलीम का मन फिर सुगबुगाने लगा और तीसरी फिल्म शुरू कर दी - *शून्य*। शून्य का परिणाम सौ कैसे आता ? आठ रील बनने के बाद यह फिल्म भी बंद।
लेकिन, आज की तारीख में सलीम अहमद को किसी पुरानी नाकामी का ग़म नहीं। वह अपनी हारी हुई बाज़ी जीतने हेतु कमर कस चुके हैं। इस बार कोई प्रोडक्शन नहीं, सिर्फ लेखन। सम्प्रति, सलीम के पास जंगल बुक जैसी एनिमेशन फिल्मों के स्क्रिप्ट तैयार हैं। कार्टून फिल्मों को वह बेहतर ढंग से लिखना जानते हैं। सोशल, रोमांटिक व कॉमेडी भी अच्छा लिखते हैं। तैयार स्क्रिप्ट्स में एक का टाइटल है - *दिल से पहले*।

